Kazi Nazrul Islam Jayanti Shayari in Hindi

Kazi Nazrul Islam Jayanti Shayari in Hindi

Kazi Nazrul Islam Jayanti Shayari in Hindi

“आप इस दुनिया में खेल रहे हैं
बड़ा बच्चा चिंतित है।
प्रलय का दिन स्पष्ट रूप से एक संयुक्त खुंडिया के लिए उत्प्रेरक है और बाद में एक गांगेय शक्ति के रूप में उनका उदय होता है
प्रभु अकेले हैं।

“খেলিছ এ বিশ্ব লয়ে
বিরাট শিশু আনমনে।
প্রলয় সৃষ্টি তব পুতুল খেলা
নিরজনে প্রভু নিরজনে।।”
― Kazi Nazrul Islam

Kazi Nazrul Islam Jayanti Shayari

“मेरे फूलों के बगीचे में जितने फूल थे”
भरी डाली दीनू धाली देवता मोर।
काश, अगर आप इसे नहीं लेते, तो फूल कितना सुंदर होता है
नील तुली खोपा खुली कुसुम दोरो

मैंने सपने में जो कहा वह चला गया
उठो और देवताओं को रोओ
प्रिय, प्रिय, प्रियतम।”

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काजी नजरूल इस्लाम

“মোর ফুলবনে ছিল যত ফুল
ভরি ডালি দিনূ ঢালি দেবতা মোর ।
হায় নিলে না সে ফুল ছি ছি বেভুল
নিলে তুলি খোপা খুলি কুসুম ডোর

স্বপনে কি যে কয়েছি তাই গিয়াছে চলে
জাগিয়া কেদে ডাকি দেবতায়
প্রিয়তম প্রিয়তম প্রিয়তম ।।”
― Kazi Nazrul Islam

Kazi Nazrul Islam Jayanti

“देश में बारिश होगी”
क्या आत्मा कमरे में अकेली नहीं रोती,
क्या बाँसुरी नदी के तट पर बिछड़ने का दर्द नहीं है?”

काजी नजरूल इस्लाम

“সে দেশে যবে বাদল ঝরে
কাঁদে না কি প্রাণ একেলা ঘরে,
বিরহ ব্যথা নাহি কি সেথা বাজে না বাঁশি নদীর তীরে।।”
― Kazi Nazrul Islam

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